इंदिरा गांधी का जीवन परिचय (Indira Gandhi Biography in Hindi)

इंदिरा गांधी का जीवन परिचय (Indira Gandhi Biography in Hindi)

इंदिरा गांधी भारत के इतिहास की एक प्रमुख महिला हैं जोकि स्वतंत्र देश की तीसरी पीएम  थी. ये भारत की पहली ऐसी महिला थी जो इस पद पर खड़ी हुई. उन्होंने सन 1966 से 1977 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया. उनके राजनीतिक कार्यकाल के दौरान उन्हें कई विवादों में घिरा पाया गया. सन 1975 से 1977 तक भारत में आपातकाल की स्थिति भी इन्हीं के कार्यकाल में थी. ये भारत की दूसरी ऐसी प्रधानमंत्री थी, जिन्होंने लंबे समय तक इस पद पर सेवा की थी. ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थी, और इनकी दुखद हत्या कर दी गई थी.


जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

1. पूरा नाम (Full Name) इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी
2. जन्म (Birth) 19 नवंबर, 1917
3. जन्म स्थान (Birth Place) इलाहाबाद, संयुक्त प्रान्त, ब्रिटिश भारत
4. मृत्यु (Death) 31 अक्टूबर, 1984
5. मृत्यु स्थान (Death Place) 1 सफ़दरजंग रोड, नई दिल्ली
6. मृत्यु का कारण (Cause of Death) हत्या
7. उम्र (Total Age) 66 साल
8. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
9. गृहनगर (Hometown) इलाहाबाद, संयुक्त प्रान्त, ब्रिटिश भारत
10. पेशा (Profession) पूर्व भारतीय राजनेता
11. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
12. आंदोलन (Movement) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
13. राजनीतिक विचारधारा (Political Ideology) सही के पक्ष में एवं उदार
14. प्रकाशन (Publications) माय ट्रुथ (1980)
इंटरनल इंडिया (1981)
15. राशि (Zodiac Sign) वृश्चिक
16. धर्म (Religion) हिन्दू
17. जाति (Caste) ब्राह्मण
18. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) कॉलेज ड्रॉपआउट

परिवार की जानकारी (Family Details)

1. पिता का नाम (Father’s Name) पंडित जवाहरलाल नेहरु
2. माता का नाम (Mother’s Name) कमला नेहरु
3. दादा जी का नाम (Grandfather’s Name) मोतीलाल नेहरु
4. पति का नाम (Husband Name) फिरोज़ गांधी
5. बेटों के नाम (Sons Name) राजीव गांधी एवं संजय गांधी
6. बहुओं के नाम (Daughter-in-law Name) सोनिया गाँधी एवं मेनका गाँधी
7. नाती का नाम (Grandson’s Name) राहुल गांधी
8. नातिन का नाम (Granddoughter’s Name) प्रियंका गांधी

इंदिरा गांधी  जी का जन्म भारत के इलाहाबाद में रहने वाले एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ. इनके पिता पूर्व भारतीय राजनेता एवं स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे. इनकी माता जी एक स्वतंत्रता सेनानी थी. इनके दादाजी श्री मोतीलाल नेहरु जी स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूतों में से एक थे, और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  के करीबी सहयोगी भी थे. जब इंदिरा गांधी  जी का जन्म हुआ, तब उनकी माता की उम्र केवल 18 वर्ष थी. नवंबर सन 1924 को इनकी माता ने एक बेटे को भी जन्म दिया था, किन्तु उसकी सिर्फ 2 दिन में ही मृत्यु हो गई थी. इसलिए इंदिरा अपने माता – पिता की अकेली पुत्री थी.

शिक्षा एवं शुरूआती जीवन (Education and Early Life)

इंदिरा गांधी जी एक जिद्दी और बुद्धिमान युवा महिला थी. उन्होंने भारत, स्विट्ज़रलैंड और इंग्लैंड के स्कूलों में अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसमें सोमरविले कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड भी शामिल था. इनकी शुरूआती शिक्षा इलाहाबाद के सेंट मैरी’स क्रिस्चियन कान्वेंट स्कूल से हुई. उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पश्चिम बंगाल के शान्तिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. किन्तु उस समय उनकी माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं था, वे यूरोप में भर्ती थी. इस वजह से उन्हें उस समय अपनी पढ़ाई छोडनी पड़ी थी. दरअसल उनके पिता अक्सर राजनीतिक कारणों के चलते घर से दूर रहते थे. उस समय उनकी माता को तपेदिक की बीमारी थी, उनका ईलाज स्विट्ज़रलैंड में चल रहा था इसलिए वे अपनी माता के साथ कुछ महीनों तक वहीँ थी. सन 1936 में इनकी माँ की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई, जब उनकी माता की मृत्यु हुई, उस समय उनके पिता जवाहरलाल नेहरु भारत में जेल में थे. वे अपने पिता से ज्यादा संपर्क में नहीं रह पाती थी और अधिकतर चिठ्ठियों के माध्यम से ही उनसे संपर्क करती थी. अपनी माता की मृत्यु के बाद वे आगे की शिक्षा के लिए इंग्लैंड गई. किन्तु वहां उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और इसके चलते उन्हें वहां से भी अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस भारत आना पड़ा. इसलिए उन्हें उनकी कॉलेज की डिग्री भी प्राप्त नहीं हो सकी. इस तरह से इनका शुरूआती जीवन काफी दुखों से भरा था, जिसके चलते वे अपनी पढाई भी पूरी नहीं कर पाई.

व्यक्तिगत जानकारी (Personal Details)

इंदिरा गांधी जी ने सन 1942 को फिरोज गांधी के साथ विवाह किया. फिरोज गांधी गुजरात के पारसी परिवार से संबंध रखते थे. वे एक-दुसरे को बचपन से जानते थे, जब वे इलाहाबाद में रहते थे. इसके बाद जब वे पढ़ाई के लिए ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में गये. तब उनकी वहां दोबारा मुलाकात हुई और दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी. किन्तु नेहरु जी इस रिश्ते से खुश नहीं थे. दरअसल नेहरु जी के नेतृत्व वाली सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले फिरोज एक प्रमुख व्यक्ति थे.

फिरोज देश के राजनीतिक सर्किल में एक उल्लेखनीय व्यक्ति के रूप में उभरे थे. उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी. जिसके कारण वे नेहरू जी को पसंद नहीं थे. किन्तु फिर बाद में उन्हें इस रिश्ते को स्वीकार करना पड़ा. इंदिरा गांधी  एवं फिरोज गांधी  के 2 बच्चे हुए. पहले सन 1944 में राजीव गांधी  और दूसरे सन 1946 में संजय गांधी हुए. 8 सितंबर, 1960 को एक प्रमुख कार्डियक गिरफ्तारी के बाद फिरोज गांधी की मृत्यु हो गई.

राजनीतिक करियर की शुरुआत (Political Career)

चूंकि नेहरु परिवार राष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र था, इसलिए सन 1955 में इंदिरा गांधी  भी युवा आयु से राजनीति में शामिल हो गई थी. उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए गहरी इच्छा जताई. आजादी के बाद इंदिरा गांधी  के पिता भारत के पहले पीएम बने और उसके बाद उन्होंने भी अपने पिता के साथ दिल्ली जाने का फैसला किया. वे अपने दोनों बेटों के साथ दिल्ली चली गई, परंतु उनके पति उनके साथ नहीं गए, वे इलाहाबाद में ही ‘द नेशनल हेराल्ड’ समाचार पत्र के सम्पादक के रूप में काम कर रहे थे, जिसे मोतीलाल नेहरु जी द्वारा स्थापित किया गया था.

कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष (President of Indian National Congress)

सन 1959 में इंदिरा गांधी  को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया. ये जवाहरलाल नेहरु जी के राजनीतिक सलाहकारों में से एक थी. 27 मई, 1964 को जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु हो जाने के बाद इन्होने चुनाव में खड़े होने का फैसला किया, और अंततः वे चुनाव जीत गई. उन्हें उस समय के तत्कालिक प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रभारी के रूप में नियुक्त किया. ऐसा माना जाता है कि ये राजनीति की कला एवं छवि में बहुत कुशल थी. इनकी सन 1965 के भारत – पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुई एक घटना द्वारा पुष्टि की गई. जब यह युद्ध चल रहा था, उन समय इंदिरा गांधी  श्रीनगर की यात्रा पर गई. सुरक्षा बलों द्वारा चेतावनी के बावजूद भी पाकिस्तानी विद्रोहियों ने होटल के बहुत करीब प्रवेश कर लिया था जहाँ वे रुकी हुई थी, किन्तु उन्होंने वहां से हटने से इनकार कर दिया. इस घटना से उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल (First Term As A Prime Minister)

सन 1966 में लाल बहादुर शास्त्री जी की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद प्रधानमंत्री के पद के लिए कई दावेदारों को देखा गया. उस समय कांग्रेस पार्टी परेशानी में थी, क्योंकि उस समय यह 2 गुटों में विभाजित थी. अंततः सन 1969 में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए चुना. प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा जी ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये. प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश की राजनीतिक, आर्थिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों में कट्टरपंथी परिवर्तन लागू किये. उनके द्वारा किये गये कार्य इस प्रकार हैं –उनके द्वारा लिये गये निर्णयों में से एक था 14 प्रमुख कमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण. यह कदम बहुत उपयोगी साबित हुआ, इससे घरेलू क्षेत्रों से बचत, कृषि क्षेत्र में निवेश और छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमों में वृद्धि हुई.
इसके बाद उनका अगला कदम इस्पात, तांबे, कोयले, सूती वस्त्र, रिफाइनिंग और बीमा उद्योग जैसे कई उद्योगों को राष्ट्रीयकृत करना था.
पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के बाद सन 1971 के तेल संकट के दौरान इंदिरा गांधी ने तेल कंपनियों को राष्ट्रीयकृत किया, जिसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन, इंडियन आयल कारपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन जैसी तेल कंपनियों का गठन हुआ.
उनके नेतृत्व में हरित क्रांति ने देश के कृषि उपज में उल्लेखनीय प्रगति की, इससे लोगों में आत्मनिर्भरता बढ़ी.
सन 1971 में पाकिस्तान गृहयुद्ध के दौरान, इन्होने पूर्वी पाकिस्तान का समर्थन किया, जिससे बांग्लादेश का गठन हुआ. इसके अलावा उनकी प्रशासनिक नीति के तहत मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब को राज्य घोषित किया गया था.

आपातकालीन स्थिति (Emergency in India)

सन 1971 के चुनावों के बाद विपक्षी दलों ने उन्हें अनुचित साधनों का उपयोग करने का दोषी ठहराया था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया. जून सन 1975 को अदालत ने उन्हें अगले 6 वर्षों तक चुनाव से प्रतिबंधित कर दिया. उस समय देश में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध, हमले, राजनीतिक विरोध और परेशानी का सामना करने की उथल – पुथल मची हुई थी. इस स्थिति को रोकने के लिए भारत के उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति ने आपातकाल स्थिति घोषित करने की सलाह दी. यह स्थिति लगभग 2 वर्षो तक चली इससे उनके पास देश में शासन करने, चुनावों और अन्य सभी नागरिक अधिकारों को निलंबित करने की शक्ति आ गई.

सत्ता से गिरना और विपक्ष रूप में भूमिका (Fall from Power and Role as Opposition)

आपातकाल की स्थिति के दौरान, पूरा देश केंद्र सरकार के शासन में आ गया. इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दुश्मनों को कैद कर लिया, नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को रद्द कर दिया गया. गांधीवादी सामाजिक महिला, जय प्रकाश नारायण और उनके समर्थकों ने भारतीय समाज को बदलने के लिए अहिंसक क्रांति में बच्चों, किसानों और श्रम संगठनों को एकजुट करने की मांग की थी. लेकिन उसे ख़ारिज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया. उनके बेटे ने भी देश को अपने हिसाब से चलाना शुरू कर दिया था. झोपड़ी में रहने वाले लोगों को कठोरता के साथ हटाने का आदेश दिया. इसके अलावा उन्होंने एक नसबंदी कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें लोगों को नसबंदी के लिए मजबूर किया गया. इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती आबादी को रोकना था.

सन 1977 में इंदिरा गांधी  जी ने विपक्ष के गठबंधन को तोड़कर चुनाव की मांग की. यह गठबंधन मोरारजी देसाई और जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में किया गया था. इन सभी कारणों के चलते पिछली लोकसभा में 350 सीटों की तुलना में कांग्रेस केवल 153 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही. इस तरह से उनके विपक्ष के रूप में भूमिका निभाने के कारण उनकी सत्ता गिर गई. इंदिरा गांधी  एवं उनके बेटे संजय गांधी  दोनों अपनी सीटें हार गये.

दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल (Second Term As A Prime Minister)

देश में आपातकाल की स्थिति के कारण भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच काफी मतभेद चल रहा था. संसद से इंदिरा गांधी  को निष्कासित करने के प्रयासों में, जनता सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कहा. हालाँकि उनकी रणनीति विफल रही और इंदिरा गांधी  को उन लोगों से सहानुभूति प्राप्त हुई, जिन्होंने उन्हें 2 साल पहले हटाने की मांग की थी. सन 1980 के चुनावों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत के साथ जीत हुई और इन्हें भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने का दोबारा मौका मिला. उनके इस कार्यकाल के दौरान पंजाब की राजनीतिक समस्याओं को कम करने के लिए ध्यान दिया गया.

ब्लू स्टार मिशन (Operation Blue Star)

सन 1983 में जर्नल सिंह भिंडरावाले और उनकी सेना ने अलगाववादी आंदोलन शुरू किया और यह आंदोलन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सिखों के लिए पूजा की जगह पर किया गया, जिसे सबसे पवित्र माना जाता है. वहां की स्थिति बिगड़ने लगी थी. इस आतंकवादी स्थिति को नियंत्रित करने और उसे रोकने के लिए उस परिसर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति के बावजूद इंदिरा गांधी  ने सेना का ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू करने का फैसला किया. सेना ने टैंक और तोपों सहित भारी तोपखानों का सराहा लिया. इस आतंकवादी खतरे को कम करने के कारण इससे कई नागरिकों के जीवन की हानि और मंदिर को काफी नुकसान हुआ. इस अधिनियम को भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक अद्वितीय त्रासदी के रूप में देखा गया था. इससे देश में तनाव शुरू हो गया, सिख समुदाय ने इसे अपना अपमान मानते हुए उसकी कड़ी निंदा की. कई सिखों ने अपने सरकारी कार्यालयों से इस्तीफा दे दिया और अपने सभी सरकारी पुरस्कार भी वापस कर दिए. इससे इंदिरा गांधी  की छवि काफी खराब हुई. अमृतसर स्वर्ण मंदिर का इतिहास जानने ले लिए यहाँ पढ़े।

इंदिरा गांधी  जी की हत्या (Indira Gandhi Death)

सन 1984 को इनके दो बॉडीगार्ड ने मिलकर इन पर कुल 31 गोलियां चलाकर इनकी हत्या कर दी. वे दोनों बॉडीगार्ड सतवंत सिंह और बेंट सिंह थे. यह उन्होंने स्वर्ण मंदिर में होने वाली त्रासदी का बदला लेने के लिए किया था. इंदिरा गांधी  को 9:30 बजे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में पहुँचाया गया. डॉ ने बहुत कोशिश की, लेकिन वे उन्हें बचा नहीं सके, और 2:20 पर उनकी मृत्यु हो गई. उन्हें अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के राज घाट ले जाया गया. इस वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बॉडीगार्ड ने अपने हथियार फेक दिए और आत्मसमर्पण कर दिया. उनके अन्य दो बॉडीगार्ड उन्हें एक कमरे में ले गये, जहाँ बेंट सिंह को गोली मार दी गई. इस षड्यंत्र में शामिल होने के लिए केसर सिंह को गिरफ्तार किया गया, और केसर सिंह एवं सतवंत सिंह को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी की सजा दी गई.

उपलब्धियां एवं विरासत (Achievements and Legacy)

एक महान राजनीतिक नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए केंद्र सरकार ने उनके नाम पर एक आवास योजना की शुरुआत की.
जिस जगह पर इंदिरा गांधी जी का अंतिम संस्कार किया गया था, उस श्मशान घाट को अब शक्ति स्थला कहा जाता है.
इन्हें समर्पित करने के लिए दिल्ली के एयरपोर्ट का नाम इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट रखा गया. इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में से एक का नाम उनके नाम पर ‘इंदिरा गांधी  नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी’ रखा गया.
इण्डिया टुडे द्वारा आयोजित एक पोल में उन्हें सबसे महान भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में वोट दिया गया. सन 1999 में बीबीसी द्वारा आयोजित एक पोल में उन्हें ‘मिलेनियम की महिला’ नाम दिया गया.
सन 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत के बाद राष्ट्रपति वी.वी. गिरी ने उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया. वहीं बांग्लादेश सरकार ने उन्हें उनके बेहतरीन कार्यो के लिए ‘सर्वोच्च राज्य पुरस्कार’ प्रदान किया.
उन्होंने अपनी शिक्षा बीच में छोड़ दी थी, लेकिन फिर भी ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें उनकी मानक डिग्री से सम्मानित किया. सन 2010 में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें दस ओकसिओन, शानदार एशियाई स्नातकों में से एक के रूप में चुनकर सम्मानित किया था.

रोचक जानकारी (Interesting Facts)

ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी राजनीतिक प्रदर्शनों में उनके हिस्सा लेने के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा सन 1942 में 13 महीने के लिए जेल जाना पड़ा था.
श्रीलंका की सिरिमावो बंदरानाइक के बाद ये दुनिया में सरकार की प्रमुख दूसरी महिला रही. ये पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए स्वतंत्रता एवं साहस का प्रतीक थी.
इंदिरा गाँधी के अंतिम संस्कार में कई लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमे फिलिस्तानी नेता यासिर सराफात भी शामिल थे. ये उनके खास मित्र थे, जोकि बहुत भावुक थे. इसके अलाव उनके अंतिम संस्कार में कुछ बॉलीवुड सितारे जैसे राज कपूर, अमिताभ बच्चन और सुनील दत्त ने भी सिरकत की थी.
इंदिरा गाँधी का कद 5 फुट 4 इंच एवं वजन 62 किग्रा था, साथ ही उनकी आँखों का रंग काला और बालों का रंग काला एवं सफेद था.
प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा ब्लू स्टार मिशन के निर्णय लेने की गुणवत्ता, निडरता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प ऐसे कारण थे, जोकि उन्हें भारत की ‘द आयरन लेडी’ कहे जाने के लिए बिलकुल सही थे.
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